दर्दे - जहान

कहाँ, किस तरह, कैसा क्यों हूँ ? सोच रहा हूँ ऐसा क्यों हूँ ? काँटों के इस बियाबान में , मैं फूलों के जैसा क्यों हूँ ?

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मोर, बगुले , वो चिड़ियाँ , घोंसलों से झांकते बच्चे ...(बचपन की यादों से रूबरू कराती ग़ज़ल)

Posted On: 26 Mar, 2012 में

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लीजिये मित्रवर ! आपके प्यार और आशीर्बाद का असर है कि मैं उम्र के २४ वें मौसम की दहलीज़ पर आ गया हूँ. यानी २७ मार्च १९८८ है मेरा जन्मदिन और इस अवसर पर आप लोग मुझे बधाई दें या न दें , मगर मैं आपको दे रहा हूँ स्मृतियों के रस से पगी एक ग़ज़ल . प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार —————–

उछलता – कूदता पूरा ज़माना भूल आये हैं ,
धूल में खेलता बचपन सुहाना भूल आये हैं .

मोर, बगुले, वो चिड़ियाँ, घोंसलों से झांकते बच्चे ,
कि दरवाज़े का वो पीपल पुराना भूल आये हैं .

हमें तितली पकड़ना याद है गेहूं के खेतों में ,
धान के खेत में छुपना – छुपाना भूल आये हैं .

आम के पेड़ की लचकी हुई टहनी का वो झूला ,
भरे तालाब में पत्थर चलाना भूल आये हैं .

राम – सीता , भरत , हनुमान वाले किस्से वो माँ के ,
पिता जी का वो कंधे पर बिठाना भूल आये हैं .

वो दादी की तरह झुक – झुक के चलने की नक़ल करना ,
वो माँ के खूंट से पैसे चुराना भूल आये हैं .

क्यों नहीं डांटते हैं ‘मास्टर जी’ आजकल हमको ,
हम अपनी आँख में काजल लगाना भूल आये हैं .

भटकते घूमते हैं हम प्रवासी पंछियों जैसे ,
किसी बगिया में हम अपना ठिकाना भूल आये हैं .

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay dixit के द्वारा
April 8, 2012

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ,धन्यवाद याद आते हैं रह रह के वो महके महके बहके दिन बात बात में कट्टी मिल्ला झगड़ा और सुलह के दिन कब छोड़ी ये बेफिक्री और कब आगे आगाज किया ? बीत गए सब खामोशी से कब जाते हैं कहके दिन ?

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 11, 2012

    संजय जी स्नेह के लिये आभार

minujha के द्वारा
March 28, 2012

जय प्रकाश जी सुंदर रचना व जन्मदिन दोनों की बधाई

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    March 29, 2012

    आदर्णीय मीनू जी स्नेह के लिये आभार…………..

March 27, 2012

कमेन्ट दिया था, आपकी इस रचना को साथ ही ५ स्टार भी. 5star तो मिल गया लेकिन लगता हैं कमेन्ट क्लियर नहीं हो पाया था. अब क्या कहूँ आप यहाँ भूलने की बात कर रहे हैं जबकि खुद तो बचपन को याद कर रहे हैं, साथ में हम सबको भी अपना बचपन याद करा दिए…. बहुत खूब……हार्दिक आभार!

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    March 29, 2012

    अलीन जी, जितना स्नेह मुझे आप लोगों से मिला उतना शायद कहीं भी नहीं. आदर्णीय रक्तले जी से क्षमा - याचना सहित कि आगे से कोई गलती नहीं करूंगा. आभार……

dineshaastik के द्वारा
March 26, 2012

बचपन ती याद दिलाती गदल की प्रस्तुति के लिये बधाई एवं जन्म दिन की शुभकामनायें… http://dineshaastik.jagranjunction.com/author/dineshaastik/

    dineshaastik के द्वारा
    March 26, 2012

    कृपया गदल को गजल पढ़ें, टाइपिंग की त्रुटि के कारण ऐसा हो गया। क्षमा चाहता हू्ँ।

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    March 27, 2012

    आस्तिक जी य़ह आपका प्यार ऒर आशीर्वाद है.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 26, 2012

जनम दिन मुबारक. मीठा खिलाना भूल आये हैं. बधाई.

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    March 27, 2012

    आभारी हूं कुशवाहा जी.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 26, 2012

आंचलिकता की सोंधी- सोंधी गंध से पगी ग़ज़ल के लिए बधाई जय जी ! ज़रा मेरी और भी झांकिए ||

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    March 26, 2012

    विजय जी आभार


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