दर्दे - जहान

कहाँ, किस तरह, कैसा क्यों हूँ ? सोच रहा हूँ ऐसा क्यों हूँ ? काँटों के इस बियाबान में , मैं फूलों के जैसा क्यों हूँ ?

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स्विस बैंकों में जमा, मेरे हिस्से की ज़मीन

Posted On: 31 Mar, 2012 में

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मैं जिस ज़मीन पर खड़ा हूँ
वह मेरी नहीं है
मेरे हिस्से में है वही फुटपाथ
और चलती – फिरती सड़क
………………………………………….
मेरे भीतर भी कुलबुलाता है झरनों का पानी
खिलखिलाते हैं हिमालय के हरे – भरे बुग्याल
कब से बसाए हूँ
हेंगिंग गार्डन और एफिल टॉवर का सपना
पर बहुत दूर लगता है ताज महल ही
………………………………………………..
देख पाऊंगा क्या ?
कश्मीर और रानीखेत
पक्षी होता तो
ज़रूरी नहीं होता वीजा – पासपोर्ट
घूम ही आता डैने पसार
……………………………………………….
सवाल करता एक सड़क का वाशिंदा
पर मिलेगी कैसे …………..?
मेरे हिस्से की ज़मीन तो
स्विस – बैंकों में जमा है .

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
April 4, 2012

खूबसूरत भावों से सजी रचना की प्रस्तुति के लिये बधाई…..

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 4, 2012

    आस्तिक जी बहुत -बहुत आभारी हूं.

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 1, 2012

आदर्णीय रक्तले जी , आभार. मैंने गलती के लिये क्षमा मांग ली थी .

akraktale के द्वारा
April 1, 2012

जयप्रकाश जी, देख पाऊंगा क्या ? कश्मीर और रानीखेत पक्षी होता तो ज़रूरी नहीं होता वीजा – पासपोर्ट घूम ही आता डैने पसार अब यदि आपकी रचनाएं अखबारों में प्रकाशित होती हैं तो क्यों ना होए.इतना सुन्दर जो लिखते हों. मुग्ध कर दिया. बधाई.

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 31, 2012

बहुत खूब…. वाह….वाह…

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 1, 2012

    अजय जी आभार.


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