दर्दे - जहान

कहाँ, किस तरह, कैसा क्यों हूँ ? सोच रहा हूँ ऐसा क्यों हूँ ? काँटों के इस बियाबान में , मैं फूलों के जैसा क्यों हूँ ?

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जागरण ने जगाये हैं हमारे सोये हुए जज्बात....."feedback"

Posted On: 8 Apr, 2012 Others में

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मुझे जागरण से जुड़े लगभग दो महीने हो गए हैं. मैंने अनुभव किया कि मुझे यहाँ वह स्नेह और सम्मान मिला , जो किसी भी मंच पर नही मिल सका .
मंचो पर जाने या पत्रिकाओं में छपने के लिए तमाम साहित्यकार संपादकों और आलोचकों के पैर दबाते हैं , परन्तु यहाँ हमने पूरे आत्म सम्मान के साथ अपनी
बात को रखा और बिना किसी चाटुकारिता के सार्थक प्रतिक्रियाएं मिली .
दूसरे शब्दों में यही कहा जा सकता है कि मैं एक बार अपनी साहित्यिक रूचि को लेकर बेहद निराश हो गया था , और मेरी प्रतिभा का अंकुर बंजर जमीन
पर पड़ा – पड़ा मृतप्राय हो गया था . परन्तु अब यह पुनः जागृत हो गया है ,” जागरण जंक्शन ” के साथ .
यहाँ हमारे विचारों को पूरा सम्मान मिलता है . साथ ही ” बेस्ट ब्लोगर ऑफ़ द वीक” तथा समय – समय पर होने वाली प्रतियोगिताएं हमारे विचारों को तो धार
देती ही हैं , बल्कि हमारे वजूद को भी आंकती हैं .
अंत में सुझाव के तौर पर अनुरोध करना चाहूँगा कि ब्लॉग के रास्ते कुछ महत्वपूर्ण रचनाकारों को साहित्यिक पत्रों – पत्रिकाओं में भी मंच दिलवाएं तथा कोई ऐसा
कदम उठायें जिससे ब्लोगर्स को आर्थिक तंगी से बचाया जा सके और इसे एक पेशे के तौर पर अपनाकर हम गौरवान्वित हों………………
……………………………………………………………………………………………
…………………………………………….जयप्रकाश मिश्र

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 24, 2012

दीप्ति जी स्नेह और परामर्श के लिये शुक्रिया

D33P के द्वारा
April 22, 2012

सही कहा .लिखने वाला हमेशा अपनी लेखनी दूसरो के साथ शेयर करना चाहता है और जागरण जंक्शन ने हमें ये मंच दिया है जहा हमें उम्दा लेखको का सानिंध्य प्राप्त है यहाँ आपकी लेखनी पर आपको निष्पक्ष प्रतिक्रिया मिलेगी ……बहुत अच्छा लगता है यहाँ .पर जहा तक ब्लोगर्स को आर्थिक तंगी की बात है कई ऐसी sites है जहाँ लेखन को पेशे के तौर पर अपनाया जा सकता है

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 11, 2012

आदर्णीय मनु जी और चन्दन जी आपका स्नेहाशीष बना रहे,यह कलम रसूख के आगे नहीं झुक सकती, 

    shashibhushan1959 के द्वारा
    April 11, 2012

    मान्यवर चन्दन जी, सादर ! ऐसा ही होना भी चाहिए ! कलम झुकने के लिए नहीं झुकाने के लिए होनी चाहिए !

मनु (tosi) के द्वारा
April 11, 2012

जय जी नमस्कार ! आपके विचार और भाव दोनों ही अच्छे है …शुभकामनाएं

चन्दन राय के द्वारा
April 10, 2012

मित्र जयप्रकाश जी नमस्कार लेखनी किसी की मोहताज नहीं होती , लेखक पीड़ा गढ़े रह नहीं सकता , कृपा अपनी लेखनी को कभी भी दबने न दे , हाँ इस मंच के सम्मान में जितना कहा जाये कम है , भावाभिव्यक्ति का अधिकार देना ही मेरी नज़र में सबसे बड़ा सम्मान है , और आप जैसे मित्र इसकी ताजगी बनाये रखते है आपका मित्र

yogi sarswat के द्वारा
April 9, 2012

बढ़िया सुझाव और सवाल उठाये हैं आपने ! आपका सुखद एहसास अच्छा लगा ! विराजमान रहिये !

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 10, 2012

    योगी जी धन्यवाद.

dineshaastik के द्वारा
April 9, 2012

जय जी आपके सुझाव और  विचार दोंनो ही सुन्दर हैं।

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 10, 2012

    आदर्णीय आस्तिक जी स्नेह के लिये आभार

vikramjitsingh के द्वारा
April 8, 2012

मिश्रा जी, सादर, आपके अनुभव और विचार अच्छे लगे…

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 10, 2012

    विक्रम जी मैंने तो शायद वही लिखा, जो आवश्यक था

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 8, 2012

अंत में सुझाव के तौर पर अनुरोध करना चाहूँगा कि ब्लॉग के रास्ते कुछ महत्वपूर्ण रचनाकारों को साहित्यिक पत्रों – पत्रिकाओं में भी मंच दिलवाएं सुन्दर विचार कविता के आलावा भी. शुभ कामना, आदरणीय मिश्र जी.

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 9, 2012

    आदर्णीय कुशवाहा जी यह आपका स्नेह और आशीर्बाद है.

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 8, 2012

जय भाजी ….. नमस्कारम ! आप कविता लिखे या फिर लेख “शौले” उगलते ही हो आपका अनुभव अभी और भी विस्तृत होगा आगे -२ देखिये होता है क्या ? :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 10, 2012

    शर्मा जी आज तक आप जैसे वरिष्ठ लोगों का आशीर्वाद ही मेरी सफलता है.

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 10, 2012

    शर्मा जी, ऐसा समय ही आ गया है कि अन्ना जैसे गांधीवादी व्यक्ति भी आपा खो बैठते हैं

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 8, 2012

जयप्रकाश जी, आप के विचार अछे लगे | धन्यवाद !!

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 10, 2012

    आचार्य जी धन्यवाद

akraktale के द्वारा
April 8, 2012

जयप्रकाश जी नमस्कार, कम समय में ही जंक्शन की गहराई को आप नाप पाने में समर्थ हुए. बधाई. आपके सुझाव भी महत्वपूर्ण हैं.

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 9, 2012

    आपने जो स्नेह हमें दिया है, हम आपके आभारी हैं , रक्ताले जी

nishamittal के द्वारा
April 8, 2012

आपका सुखद अनुभव अच्छा लगा

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 9, 2012

    शुक्रिया निशा जी

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 13, 2012

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