दर्दे - जहान

कहाँ, किस तरह, कैसा क्यों हूँ ? सोच रहा हूँ ऐसा क्यों हूँ ? काँटों के इस बियाबान में , मैं फूलों के जैसा क्यों हूँ ?

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सरगना..........(लघुकथा)

Posted On: 16 Apr, 2012 Others में

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prakash
अचानक ट्रेन की उस बोगी में ‘चोर – चोर की’ आवाजें बुलंद हो गई थी. वह किसी महिला की चेन तोड़ कर भाग रहा था. इससे पहले कि वह नीचे उतर पाता, कुछ बलिष्ठ हाथों ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया था. थोड़ी ही देर में ट्रेन भी रुक गई थी और सहसा उस चोर पर लात – घूंसों की बौछार सी हो पड़ी थी.
जब सभी के हाथ – पाँव उसे मार कर थक गए तो पुलिस के हवाले कर दिया गया, और थानेदार ने मानो सवालों की झड़ी सी लगा सी थी. क्या नाम है ?……….कहाँ रहता है? ……..क्या करता है ?……आदि – आदि . वह बारी – बारी से सवालों का बोझ हल्का कर ही रहा था कि थानेदार ने उससे एक और सवाल पूछा – ” तेरे गिरोह का सरगना कौन है?”
चोर ने शांत लहजे में उत्तर दिया – “आप…….” और अपनी टूटी कलाई देख कर बुरी तरह रो पड़ा.



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

D33P के द्वारा
April 22, 2012

जयप्रकाश जी नमस्कार स्वीकार करे…….. इस तरह की घटनाएँ आये दिन देखने सुनने को मिलती है .कभी कभी चोर अपने सरगना के हाथो ही पिट जाता है बेचारा… होना तो ये चाहिए था की सबको मिलकर थानेदार को भी पीट देना चाहिए था

कुमार गौरव के द्वारा
April 19, 2012

जयप्रकाश जी नमस्कार दिल को छूती, कुछ कहती रचना. बधाई. मेरे ब्लॉग पर जरूर आइयेगा, आपका स्वागत है.

yogi sarswat के द्वारा
April 18, 2012

मित्रवर जयप्रकाश जी नमस्कार, व्यवस्था पर करारा तमाचा है. वाकई आज रक्षक ही भक्षक बना बैठा है. साधुवाद.

April 18, 2012

भाई, थानेदार की बात तो बहुत दूर हैं. हम सभी शरीफ बनकर अपना स्वार्थ पूर्ति के लिए दिन-रात दूसरों को लुटते रहते . पर कोई अपने पेट के लिए दो रोटी चुरा लेता है तो हम उसे इतना मरते है जैसे कि इस दुनिया में एकलौता चोर वही है…..कभी मौका मिला तो आँखों देखि घटना का वर्णन करूँगा……

akraktale के द्वारा
April 17, 2012

जयप्रकाश जी नमस्कार, व्यवस्था पर करारा तमाचा है. वाकई आज रक्षक ही भक्षक बना बैठा है. साधुवाद.

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 17, 2012

    हमें आदर्णीय अशोक रक्ताले जी की प्रतिक्रिया का इन्तजार रहता है, और वह मिल गयी है.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 16, 2012

jayprakhsh jee , bahut khoob | achhee laghukatha ! badhai !! khatte -meethe pal men aap bhee ullikhit hain !!

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 17, 2012

    आचार्य जी आपके स्नेह और आशीर्वाद से ही हमारी हस्ती है . धन्यवाद

RAHUL YADAV के द्वारा
April 16, 2012

बहुत खूब जयप्रकाश जी।

    Jayprakash Mishra के द्वारा
    April 16, 2012

    राहुल जी यह आपका स्नेह है.


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